टेलिविज़न और सोशल मीडिया पर आने वाली क्रूर तसवीरें काफ़ी भयानक हैं: कार ब्लास्टिंग, नाइटक्लबों में होने वाली सामूहिक हत्याएं, हत्यारे पुलिसवाले और पुलिसवालों के हत्यारे. लेनिन ने इसी को अंतहीन भयानकता का नाम दिया था......अंतहीन. और ये केवल दूर दराज़ के देशों जैसे इराक़, अफ़गानिस्तान और मेक्सिको में ही नहीं बल्कि इस पृथ्वी के अमीरतम देशों के कुछ बेहद समृद्ध शहरों में भी हो रहा है. यह परिघटना पूंजीवाद का क्रूरतम संकट है, इस व्यवस्था का ऐसा भयानक चेहरा जिसने समूची मानव जाति को अपने चपेट में ले लेने का खतरा पैदा कर दिया है.

दस ट्रेड यूनियनों एवं उनके समबद्ध संगठनों द्वारा एक साथ मिलकर किया गया हड़ताल का आह्वान मजदूरों के जायज मांगों के लिए है.

मीडिया और अकादमिकों के बीच खाद्य पदार्थों के साथ अमेरिकियों के निष्क्रिय रिश्तों की लगातार आलोचना होती है या उसका मजाक बनता है. लेकिन जो बात कभी विश्लेषण का विषय नहीं बनती है, वो है – इस निष्क्रियता की मूल वजह. मार्क्सवाद का मानना है भौतिक परिस्थितियां ही चेतना को जन्म तय देती हैं. हमारा शारीरिक एवं सामजिक वातावरण हमारे पास उपलब्ध सभी विकल्पों को सीमित करके बड़े पैमाने पर हमारी रुचियों को प्रभावित करता है.